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Saturday, March 30, 2013

11:58:00 PM

सरोजिनी नायडू




सरोजनी नायडू 
(जिन्होने जगाई आज़ादी की अलख )
सरोजनी नायडू अपने देश को आज़ादी दिलाने के लिये कई इस्त्रियो ने कडा संघर्ष किया उनमे सरोजनी नायडू का अपना अलग ही  स्थान है वह एक विदुषी और बहुआयामी व्यक्तित्व वाली स्वतंत्रता सेनानी थी | उनकी आवाज बेहद मधुर थी | इसी वजह से वह पुरे विश्व में भारत कोकिला के नाम से विख्यात थी | 
सरोजिनी नायडू का जन्म १३ फरवरी १८७९ को हैदराबाद में हुआ था | इनके पिता अधोर नाथ एक विद्वान् थे तथा माता कवयित्री थी | बचपन में वह बेद्र्द मेघावी छात्रा थी | उनकी बुद्धिमता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है की मात्र १२वर्ष की उम्र में ही वह बहुत अच्छे अंको के साथ १२वि कक्षा की परीक्षा पास कर चुकी थी १३ वर्ष की उम्र में उन्होंने 'लेडी आफ दी लेक ' शीर्षक कविता की  रचना की वह १८९५ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये इंग्लैंड गई और पढई  के साथ कविताए भी लिखती रही | १९०५ मेंगोल्डेन थ्रेशोल्ड शीर्षक से उनकी कविताओ का पहला संग्रह  प्रकाशित हुआ था | इसके बाद उनके दूसरे और तीसरे कविता संग्रह 'बर्ड आफ टाइम 'तथा 'ब्रोकन विंग्स' ने उन्हे सुप्रसिद्ध काव्यित्री बना दिया | 
देशप्रेम की धुन - १८९८ मे सरोजनी गोविंदराजुलू नायडू की जीवन संगिनी बनी |१९१४ मे इंग्लैंड मे वे पहली बार गाँधी जी से मिली और उनके विचारों से प्रभावित होकर देश के लिये समर्पित हो गई | एक कुशल सेनापति की भाती उन्होने अपनी प्रतिमा का परिचिय  आन्दोलन , समाज सुधार और कांग्रेस पार्टी के संगठन मे दिया | उन्होने अनेक राष्ट्रीय आन्दोलन का नैत्रव्य  किया और कई बार जेल भी गई | किसी भी तरह मुशकिल की परवाह छोडकर वह दिन - रात देशसेवा मे जुटी रहती थी |वह  गाँव- गाँव घूमकर लोगो के बीच देशप्रेम का अलख जगाते हुई लोगो को देश के प्रति उनके कर्तव्य की याद दिलाती थी | उनके ओजस्वी भाषण जनता के हर्दिय को झक झोर्र देते थे | उनका भाषण सुनकर लोग देश पर अपना सर्वस्व नौओछावर करने को तैयार हो जाते थे | वह कई भाषाओ की प्रकांड विद्धमान थी | वह उपिस्थित जनसमोह की समझ के अनुरूप अंग्रेजी , हिंदी , बंगला व गुजरती मे भाषण देती थी | लन्दन की भी एक जनसभा मे इन्होने अपने भाषण से वहा उपिस्थित सभी श्रोतायो को मंत- मुग्ध  कर दिया था | 
योगदान 
अपनी लोकप्रियता और प्रतिभा के कारण १९२५ मे कानपूर मे हुई कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्ष बनी और १९३२ मे भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गई भारत की स्वंत्रता प्राप्ति के बाद वह उत्तर प्रदेश की राजपाल बनी | इसतरह उन्हे देश की पहली महिला राज्यपाल बनी | इस तरह उन्हे देश की पहली महिला राज्पाल होने का गौरव प्राप्त हुआ | उन्होने अपना सारा जीवन देश को सम्पर्तित कर दिया था | २ मार्च १९४९को उनका स्वर्गवास हो गया लेकिन देश की आज़ादी मे उनके अमुल्लय  योगदान को भूलाया नहीं जा सकता है |

Works

Each year links to its corresponding "[year] in poetry" article:
  1. 1905 The Golden Threshold, published in the United Kingdom
  2. 1912 The Bird of Time: Songs of Life, Death & the Spring
  3. 1917 The Broken Wing: Songs of Love, Death and the Spring, including "The Gift of India"
  4. 1943The Sceptred Flute: Songs of India, Allahabad:
  5. 1961 The Feather of the Dawn, posthumously published, edited by her daughter, Padmaja Naidu
8:18:00 AM

कविता by सरोजिनी नायडू



क्या यह जरूरी है कि मेरे हाथों में
अनाज या सोने या परिधानों के महंगे उपहार हों?


ओ ! मैंने पूर्व और पश्चिम की दिशाएं छानी हैं
मेरे शरीर पर अमूल्य आभूषण रहे हैं
और इनसे मेरे टूटे गर्भ से अनेक बच्चों ने जन्म लिया है
कर्तव्य के मार्ग पर और सर्वनाश की छाया में
ये कब्रों में लगे मोतियों जैसे जमा हो गए।
वे पर्शियन तरंगों पर सोए हुए मौन हैं,
वे मिश्र की रेत पर फैले शंखों जैसे हैं,
वे पीले धनुष और बहादुर टूटे हाथों के साथ हैं
वे अचानक पैदा हो गए फूलों जैसे खिले हैं
वे फ्रांस के रक्त रंजित दलदलों में फंसे हैं
क्या मेरे आंसुओं के दर्द को तुम माप सकते हो
या मेरी घड़ी की दिशा को समझ करते हो
या मेरे हृदय की टूटन में शामिल गर्व को देख सकते हो
और उस आशा को, जो प्रार्थना की वेदना में शामिल है?
और मुझे दिखाई देने वाले दूरदराज के उदास भव्य दृश्य को
जो विजय के क्षति ग्रस्त लाल पर्दों पर लिखे हैं?
जब घृणा का आतंक और नाद समाप्त होगा
और जीवन शांति की धुरी पर एक नए रूप में चल पड़ेगा,
और तुम्हारा प्यार यादगार भरे धन्यवाद देगा,
उन कमांडरो को जो बहादुरी से संघर्ष करते रहे,
मेरे शहीद बेटों के खून को याद रखना!
- सरोजिनी नायडू 


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"जय हिन्द जय भारत "    

Friday, March 29, 2013

12:41:00 AM

जिंदगी तुम क्या हो



जिंदगी तुम क्या हो !
कभी एक मुस्कुराती शहर
कभी उदास मायूस शाम
कभी हो तन्हा बेबस रात
तो कभी हो खुशियों का पैगाम
जिंदगी तुम क्या हो !!
                 
                   कभी हो माँ - सा दुलार
                   कभी हो निर्दयी समाजिक तिरस्कार
                   कभी हो खुशियों की अठखेलिया
                   और कभी प्रीतम का प्यार
                   जिंदगी तुम क्या हो !!

कभी हो खुशियों का डेरा
कभी हो खुशियों का घेरा
कभी - कभी तडपती दुपहरी
और कभी रैन बसेरा
जिंदगी तुम क्या हो !!
 
                 कभी हो प्रीतम कभी हो मीत
                 कभी - कभी हो विछोह का गीत
                 कभी हो खुद की हार
                 और कभी अपनों की जीत
                 जिंदगी तुम क्या हो !!
                  

Tuesday, March 26, 2013

9:15:00 AM

हम होली क्यों मनाते है

होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की।

माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है। प्रतीक रूप से यह भी माना जता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।

निवेदन : होली के दिन कई लोग नशा और मांस का सेवन करते है कृपया यैसा ना करे करने से पहले ये पोस्ट जरुर पढ़े click link  " http://bindasspost.blogspot.in/2013/03/drinkers.html  "
               
आप सभी को होली की हार्दिक शुभ कामनाये 

                

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"जय हिन्द जय भारत "  


Monday, March 25, 2013

3:13:00 AM

नशेबाजो के लिए इनामी प्रतियोगिता

सभी पाठको को सूचित किया जाता है कि इस प्रतियोगिता में अधिक से अधिक संख्या में नशा करने वालो को चार इनाम और चार फायदे दिये जाते है -
 चार इनाम :
            पहला इनाम                    :  केंसर
            दूसरा इनाम                     :  टी ० वी ० और खांसी
            तीसरा इनाम                    :  ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक
            चौथा इनाम                      :  नेत्र ज्योति कम हो जाएगी

चार फायदे :

  1. आपके घर में चोरी नही होगी, क्योकि आप सारी रात जागते रहेगे तथा खांसते - थूकते रहेगे !
  2. आपको बुढ़ापा नही आयेगा, क्योकि 30 - 40 वर्ष उम्र में ही आप कफ निकालते - 2 भगवान को प्यारे    हो जायेगे !
  3. आप को कुत्ता नहीं कटेगा, क्योकि छोटी उम्र में ही आपको लाठी का सहारा लेना पड़ेगा ! लाठी होने के कारण कुत्ता डर कर भाग जायेगा !
  4. शराब के आदि होने के बाद आपको घर परिवार वालो से बेज्जती सहन करने की सहन शक्ति बढ़ेगी !



                   विश्व के सभी मूर्धन्य विचार को मनीषियों एवं अन्य लोगो ने धुम्रपान व् मद्द्य्पान को समस्त बुरइयो की जड़ माना है भगवान बुद्ध ने एक बार कहा था शराब से सदा भयभीत रहना, क्योकि वह पाप व अनाचार की जननी है ! बाइबिल कहती है- तू यह जान ले कि मद्दपान करेगा तो परमपिता के गुणों को अपने में अवतरित नही करेगा !महात्मा गाँधी ने कहा है -" नशा - नाश का दूसरा ऩाम है ! तन, मन, धन तीनो बेकाम है ................
                   क्या आप प्रतियोगिता में भाग लेना पसंद करेगे ! विशेष प्रियजनों, युवा बदल रहा है ! आप भी बदलने की कोशिश करे ! यह महाकाल का आवाहन है ! अत : नशे से मुक्त होकर अपना जीवन सफल बनाओ, गन्दे विचारो को काटने के लिए सद्विचार फैलाने में सहयोग करे !

नोट - दुव्यर्सन छोड़ने पर कुछ दिन सौफ एवं इलायची का सेवन करे !

चार दिन की सजा ,जीवन भर का मजा !!

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Saturday, March 23, 2013

8:50:00 AM

भगत सिंह कविता



तू ना रोना, के तू है भगत सिंह की माँ

मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं
डोली चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी
हँसके हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं

जलते भी गये कहते भी गये
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसीका जीना है
जो मरना देश पर जाने

जब शहीदों की डोली उठे धूम से
देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं
पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन
उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों मैं जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन

कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से
कोई यू पी से है, कोई बंगाल से
तेरी पूजा की थाली में लाये हैं हम
फूल हर रंग के, आज हर डाल से
नाम कुछ भी सही पर लगन एक है
जोत से जोत दिल की जगा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन ...

तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र
उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम
तेरी धरती पे है जो कदम ग़ैर का
उस कदम का निशाँ तक मिटा देंगे हम
जो भी दीवार आयेगी अब सामने
ठोकरों से उसे हम गिरा जायेंगे

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अगर आप की कलम भी कुछ कहती है तो आप भी अपने लेख हमे भेज सकते है ! हमारा Email id - gauravamit93@gmail.com ... 
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"जय हिन्द जय भारत''  

Sunday, March 17, 2013

1:49:00 AM

यज्ञ करने के फायदे

यज्ञ से खुलते है सौभाग्य के द्वार  :-

हम अपनी सत्य सनातन संस्कृति को अधार माने तो यज्ञ से सम्पूर्ण शुभकामनाये पूर्ण होती है ! सतपथ ब्राम्हण में कहा गया है कि मानव जीवन में जितने भी शुभकर्म किये जाये उनमे यज्ञ सर्वश्रेष्ठ कर्म है ! स्वर्ग की कामना हो, सुख समृद्धि की इच्छा हो, आनंद उत्साह की जरूरत हो, शांति और संतोष की प्राप्ति हेतु यज्ञ ही परम साधन है ! मानव जीवन के सम्पूर्ण अभावो को यज्ञ का पभाव दूर करता है !
         वाल्मीकि रमायण में प्रसंग आता है कि सन्तान के अभाव में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ हेतु श्रृंग ऋषि को आमंत्रित किया था ! श्रृंग ऋषि ने रजा दशरथ को आश्वस्त करते हुए कहा था -
इष्टि तेअहं करिष्यामि पुत्रियां पुत्रकारणात !
अथर्वशिरसि प्रोक्तैर्मन्त्रै : सिध्दां विधनत : !! (बा. का. 14 /2 )
हे राजन! तुम्हारे यहा संतानोत्पत्ति के लिए अथर्ववेद के मंत्रो द्वारा मै विधि पूर्वक पुत्रेष्टि यज्ञ कराउगा, जिसे मै अच्छी प्रकार जानता हु ! यज्ञ फल तथा ऋषि के आशीर्वाद से राजा दशरथ के घर स्वयं भगवान श्रीराम सहित चार पुत्रो का जन्म हुआ ! स्वर्ग समान अयोध्या नगरी में चहुओर मंगलगान गाए गये ! यज्ञ जितने प्राचीनकाल में उपयोग और कल्याणकारी थे, अधुना उससे ज्यादा प्रासंगिक और लाभकारी है !   

Friday, March 15, 2013

11:20:00 PM

राष्ट्र भक्ति कविता


कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,
मिले गर भाव अच्छा जज भी कुर्सी बेच देता है....तवायफ फिर भी अच्छी है के वो सीमित है कोठे तक,पुलिस वाला तो चौराहे पे वर्दी बेच देता है..जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी,
जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है..
कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान है
जिस पर,बना कर विडियो उसकी वो प्रेमी बेच देता है...
ये कलयुग है कोई भी चीज नामुमकिन नहीं इसमें,
कलि, फल, पेड़, पौधे, फूल माली बेच देता है...
जुए में बिक गया हु मैं तो हैरत क्यों है..लोगो को,
युधिष्ठर तो जुए में अपनी पत्नी बेच देता है....
कोयले की दलाली में है मुँह काला यहाँ सबका,
इन्साफ की क्या बात करे इंसान ईमान बेच देता है..
जान दे दी वतन पर जिन बेनाम शहीदों ने,
इक हरामखोर आदमखोर नेता इस वतन को बेचदेता है|


Wednesday, March 13, 2013

9:08:00 AM

वतन की एक आवाज


धमाके तो होते रहते, मत इतना कोहराम करो !
.
कौन तुम्हारा मरा है, सब अपना-अपना काम
करो !!
.
परसों असमिया मरा था, कल
मरा वो बंगाली था!
.
आज तेलगू मर गया है,
बस जारी एक बयान
करो !
.
.
जिस दिन तुम्हारा मरेगा,
रो लेना फफक-फफक
के !
.
दो लाख का चढ़ा वाले कर,
फिर ऐशो आराम
करो !!
.
सिंध, बंग, पंजाब गया, अपने बाप
का क्या गया !
.
तोता रट्टू जैसे तुम तो,
जन गण मन का गान
करो !!
.
लुटते रहो,
पिटते रहो,
रोज लड़ते रहो
आपस में !
.
जात-पांत के नाम पर,
फिर अगला मतदान करो !!
.
गर बचा पूर्वजों का खून,
थोड़ा साभी नसों में !.
.
एक बार राणा-शिवा, कृष्ण अर्जुनका ध्यान
करो !!
.
फिर भुजाएँ फडक उठे,
भारत के वीर जवानों की !
हम पर प्रहार करने वालों के,
गिन-गिन करके
प्राण हरो !! ...

जय हिन्द ।...
एक निवेदन - आप सभी Comment तो करते हो पर जब तक आप Join नही करेगे तब तक आप का Comment मुझे नही मील पायेगा !  

Tuesday, March 12, 2013

5:19:00 AM

हर एक चीज कुछ कहती है


 ('.')
<))>
_/\_
दोस्तो,
आप लोगो लगभग रोड पर ट्रको,रिक्शा,जीप या तांगा पर लिखा हुआ देखा होगा..??

1.]
माँ का आशिर्वाद एक ट्रक के पीछे लिखा है.

इसका मतलब यह है कि यह ड्राईवर अपना घर बार छोड कर एक मुसाफीर बन गया है बस उसके साथ माँ का आशिर्वाद है.
याद करो आपकी माँ ने घर से निकलते समय क्या कहा था.?

2.]
सोचकर सोचो साथ क्या जाएगा

इसका मतलब है,
आप इतनी जल्दबाजी क्यु कर रहे हो.?
किसके लिए आप इतने उतावले होकर वाहन चला रहे होँ.?

धीरे चलो सब साथ रहेगा वरना उपर वाली लाईन वापस पढ लेना..

3.]
बुरी नजर वाले तेरा मुँह काला

इसका मतलब है कि आप मुझ पर गुस्सा क्यु हो रहे हो.?

मैँ आपको साईड नही दे रहा इसलिए सोचो
आपके पीछे वाला भी आपको गाली दे रहा होगा..

4.]
फिर मिलेगेँ

इस लाईन का मतलब है कि यह जिंदगी बहुत छोटी है,
इसको जीना सीखो,
जिँदा रहे तो फिर मिलेगेँ

5.]
हम साथ साथ है

इसका मतलब साफ है कि आप और मेँ एक साथ वाहन चला रहे है,
आप ओवर अटेक करने की कोशिश करोगे तो शायद साथ छुट सकता है.
इसिलिए साथ रहो निडर रहो.

इसिलिए दोस्तो,
वाहन चलाने मेँ सावधानी रखे आपका भी कोई घर पर इन्तजार कर रहा है,

नियमो का पालन करे,
सुरक्षित रहे और सुरक्षित दुसरो को भी सुरक्षित रखे