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Monday, March 31, 2014

8:49:00 AM

Girls Poem



Husband hamara aisa ho
pocket me jiske paisa ho
Lambi jiski hight ho
Gusse ka wo light ho
Jab saas se meri fight ho
Kahe jaanu tum hi RIGHT ho.


Sunday, March 30, 2014

7:04:00 AM

Funny Wallpaper


Saturday, March 29, 2014

11:01:00 PM

देशभक्ति कविता



शहीदो को नमन उन चिताओ को नमन 
जो जल कर मिट्टी में मिले है उन्हें भी नमन 
जो हवा उन्हें छू कर गुजरी है 
उन हवावो को भी है नमन 

वो भले ही चल गए है इस दुनिया से 
पर आज भी उनके चिता की धधकती आग है दिल में 
हम झुक कर करते है सलाम उन्हे 
जो हँस कर गवा दी जान अपनी 
वो तो चले गए दुनिया से 
पर जा न सकेगे मेरे दिल से 
उनके चिता कि धधकती आग,हमें आगे बढ़ाती रहेगी 
हमभी सिख रहे है जीना मरना वतन के लिए 
और सिखा है हमने उन शहीदो से 
जिन्होंने हॅसते - हॅसते अपनी जान गवा दी। 

जय हिन्द जय भारत। बन्देमातरम् ..............

«« लोग हमें पागल कहते फिरते है  »»                «« ए मेरे वतन के लोगो  »»
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अगर आप की कलम भी कुछ कहती है तो आप भी अपने लेख हमे भेज सकते है ! हमारा Email id - gauravamit93@gmail.com ... 
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"जय हिन्द जय भारत''  
1:14:00 AM

Good Night SMS

Chand ne kar diya hai taro ko invite,
Suraj ne Pakad li hai subah ki FLIGHT,

rab ko yaad kar lo aur off kar lo LIGHT,
Meri taraf se aapko acha sa GOOD NIGHT...

«« Previews SMS  »»   


12:54:00 AM

Friendship SMS

 DIL se dur "chahat"aur   
"Aankho se dur kbi spne nhi hote  
khabi na mehsus karna aap hmari kami 
kyuki apno se dur kbhi apne nhi hote. 

«« Previews SMS  »»     

12:40:00 AM

True Friends


What is the meaning of true  friend.-
jab ek dost apni akhari sanse le raha ho aur uska dost ankho me ansu le aye aur kahe,chal uth yaar Aaj last time Maut ki Class Bunk krte hain.  Aapne un friends ko yeh msg send kro:jinki  umr ap apni umr se lmbi chahte ho maine to kr diya.

« Previews SMS »                             « More SMS »   

Sunday, March 23, 2014

7:04:00 AM

Internet MCQ

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internet mcq with ans -
6:53:00 AM

CCC MCQ with ANS

Click on Downloads Q sheet 


CCC MCQ with Ans.pdf -

Saturday, March 22, 2014

9:12:00 AM

देशभक्ति कविता



अब चल पड़े कदमो से कदम मिला कर
तो रुकना ना हो कही पर 
जी जान लुटा दे भारत माँ के लिए
अगर मौका मिले एक बार तो 

जब कोई दुश्मन भारत माँ को दिखाए तेवर 
तो हम सभी ढीले कर दे उसके तेवर !! 

अगर दुश्मन हो आगे, तो दिखा दे हम अपनी ताकत !!

हम चेता देते है तुम सभी को कि हद में रहो,
हम  म  .. म .चेता देते है तुम सभी को कि हद में रहो 
हम है भारत माँ के लाड़ले, जो जीते है हथेली पे जान लिए !!

अब चल पड़े कदमो से कदम मिला कर
तो अब ना रुकना होगा कही पर 

तुम लाख चाहो रोकना, पर रोक न सकोगे
इसलिए हद में रहो वरना तुम जाओगे अपने जान से 
डाल दो अपने हथियार हमारे सामने 
वरना जाओगे तुम अपने जान से
क्योकि चल पड़े है कदमो से कदम मिला कर 
तो अब हम न रुकेंगे कही पर 

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Sunday, March 16, 2014

9:54:00 PM

इस तरह आज होली मनाएगें हम



इस तरह आज होली मनाएगें हम
इस तरह आज होली मनाएगें हम
तुम आना लेके गुलाल और लगायेगे हम 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
कर देगे सारे गीले सिकवे दूर हम  
इस तरह तुम्हे लगायेगे गुलाल हम 
की न छूटेगा कोई अंग  
तुम छुड़ाओगी कलाई फिर भी न छोड़ेगे हम 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
प्यार के रंग में साथ नहायेंगे हम 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
मै जनता हु हो तुम गुस्सा
पर आ जाना हाथो में गुलाल लिए  
और मै मनाउ तो मान जाना प्रिये 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
कि कर देगे सारे गीले सिकवे दूर 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
मैं जनता हु मनाउगा तो मान जाओगी प्रिये 
जो भी वादे किये थे निभाएंगे हम 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
इस तरह आज होली मनाएगें हम............
चाँद तारो का दिल नहीं तोडना
चाँद तारो का दिल नहीं तोडना 
अपने कमरे कि खिड़की खुली छोड़ना 
चाँद तारो का दिल नहीं तोडना
अपने कमरे कि खिड़की खुली छोड़ना 
तुम ना आओगी तो आयेगे हम 
बस अपने कमरे की खिड़की खुली रखना 
तुम ना आओगी तो आयेगे हम 
इस तरह आज होली मनाएगें हम
इस तरह आज होली मनाएगें हम ............... इस तरह आज होली मनाएगें हम

[ Happy Colourfull Holi ]

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Saturday, March 15, 2014

8:58:00 AM

खेलेंगे हम होली




                        फिर से एक सांप्रदायिक त्यौहार मुँह बाये खड़ा है | समस्या ये है की इस बार पर्यावरण को क्या नुकसान होने वाला है ... शायद पानी का | मीडिया आपको लगातार सूखे की तस्वीरे दिखायेगा | बताएगा कि महाराष्ट्र में किसान पानी की वजह से सुसाइड कर रहे हैं | हमको पानी बचाना है | और इस बार जो हमने पानी से होली खेली तो धरती पर २/३ की जगह १/१० जगह पर ही पानी रह जायेगा | फिर "तिलक होली" टाइप कोई नया जुमला उछाला जायेगा | सेक्युलर लोग टीवी में डिबेट करेंगे | हमको बतायेगे कि ग्रीन हाउस इफेक्ट भी होली पर पानी बर्बाद करने के कारण हुआ है | ओजोन में छेद भी होली के ही कारण हुआ है | फिर अपन सब "सूखी होली" खेलेंगे और शाम को थम्स -अप, पेप्सी, चढ़ाएंगे बिना ये जाने कि कितना पानी इन्हें बनाने में बर्बाद होता है | मटन चिकन का प्रोग्राम भी बनेगा | क्युकि इनको धोने में भी पानी बर्बाद नहीं होता | 
दोस्तों, पानी बचाने के हजार तरीके हैं और हजारों मौके | चाहे वो आपकी डे टू डे लाइफ में शावर से नहाना हो या आपका टैप खोलकर टूथ पेस्ट करना हो या बेमौके पर अपनी गाडी पानी से धोना हो या चाहे आपका आर. ओ. का पानी शुद्ध करना हो | क्या इन सभी मौको पर पानी बर्बाद नहीं होता ? फिर होली पर ही पानी बचाने का नाटक क्यों ? ये जितने भी लोग होली पर पानी बचाने का आवाहन करते हैं सब के सब टब में नहाते हैं | १ बार नहाने में ही लगभग २०० से ३०० लीटर पानी बर्बाद करते हैं | टूथ पेस्ट भी करते है तो टैप खोलकर | रोज ऑफिस जाते हैं तो चमचमाती धुली हुई गाड़ी में | तो फिर ये हिपोक्रेसी क्यों ?
ये तमाशा सिर्फ होली पर ही नहीं किया जाता है दीपावली पर भी होता है | क्युकि साल में सिर्फ और सिर्फ उसी दिन पर्यावरण की "सोनिया- प्रियंका" होती है | बाकी जब न्यू इयर सेलिब्रेशन होता है तब कहाँ आतिशबाजी धुआं करती है ? जब ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी होती है तब क्या आतिशबाजी आपको ओजोन का छेद भरती हुई नज़र आती है ? क्यों करवाचौथ महिला विरोधी हो जाता है, क्यों महिषासुर वध दलित विरोधी हो जाता है ? आखिर क्यों ?
पर इस बार अपन ऐसा नहीं करेंगे | पिछले कई दिनों से १५ की जगह लगभग १२ लीटर पानी से नहाते हैं | आजकल कपडे ३ की जगह ४ दिन पहन कर धो रहे हैं | क्यों ? क्युकि हम तो जमके होली मनाएंगे | क्युकि हम तो जम कर रंग लगायेंगे | और जम कर पानी बहायेंगे | "करते रहो तुम विधवा प्रलाप, लगे रहे तुम्हे इसी तरह जुलाब "  | सेक्युलरिस्टस तुम्हारी एसी की तैसी ...
 .... Happy Holi ....




Thursday, March 13, 2014

8:27:00 AM

New Like Style

Wednesday, March 12, 2014

9:18:00 AM

Like Style

1:11:00 AM

मेरी निगाहे भीड़ में न अटकी होती



मेरी निगाहे भीड़ में  न अटकी होती  तेरे पे ,
अगर तू सभी से अलग न होती  !!
प्यार न हुआ होता तुझसे ,
अगर तू इतना प्यारी ना होती !!
न हो पाता तेरे इतना करीब ,
अगर तेरा प्यार सच्चा न होता  !!
यु मेरी निगाहे भीड़ में  न अटकी होती  तेरे पे ,
अगर तू सभी से अलग न होती  !!

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Monday, March 10, 2014

1:44:00 AM

कृष्ण भक्ति



कोई पागल पिता का है ... कोई पागल है माँ का !
कोई पागल बहन का है ... कोई पागल है भाई का !
कोई पागल है बेटी का ... कोई पागल जमाई का !
कोई पागल है इज्ज़त का ... कोई पागल कमाई का !
कोई पागल है शोहरत का ... कोई पागल है नारी का !
कोई पागल है दौलत का ... कोई पागल घरारी का !
है ... पागलपन मै ये दुनिया ... कि दुःख सुख की पिटारी का !
असल मै ... है वही पागल ... जो पागल है बिहारी का !  

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आप सभी का हार्दिक स्वागत है ! आप Ψ !!卐!!   गीता को पढ़े अब FB पे भी हिंदी & English दोनों में मित्रो like कर जुड़े हमसे आप का स्वागत है Ψ !!卐!!  [ link- Srimad Bhagavad Gita ] Ψ !!卐!! 



1:19:00 AM

Inspirational Quotes

12:09:00 AM

अनमोल वचन



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Sunday, March 9, 2014

9:39:00 AM

Funny Lover Jokes



ARZ HAI...    
Kisi Ka Haath thaam Kar Chhoddhhna Nhi,
Wada Kisi Se Karo to todna Nhi,
Koi Agar tod De DiL aapka,
To usko bina "Latiyaaye" Chhoddhna Nhi;):-)

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8:13:00 AM

Virtual Images


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Saturday, March 8, 2014

12:23:00 AM

Happy Woman Day


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Friday, March 7, 2014

9:33:00 PM

अखंड भारत




भारत को जो काट सके ऐसी कोई शमशीर नही.....!
इतना खून बहेगा सरहद पर जितना गंगा में नीर नही....!!

घर का झगड़ा बाजार में करो ये कोई तरीका नही....!
कश्मीर किसका है हम बताएँगे अमेरिका नही......!!

अबकी हुआ युद्ध तो मेरा कुछ नुकसान ना होगा.....!
मगर दुनिया के नक़्शे पर फिर से पाकिस्तान ना होगा.......!!


7:36:00 AM

भक्ति सार




सुनकर बांसुरी की मीठी तान
हो जाती तेरी राधा परेशान
जब भी देखूं तब साथ में रहती
करे मनमानी बड़ी नादान ।
हरदम दिखती तेरे होठों पे
जब भी करती तेरा ध्यान ।
कुछ समझो मेरी परेशानी
वरना ले लेगी ये मेरी जान।
करे मनमानी बड़ी नादान ।

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Thursday, March 6, 2014

8:19:00 AM

Sad Shayari


Aapse dur jane ka irada na tha. 
Sadasath rhne ka bhi wada na tha.
Aap yad na kroge jante the hum. 
Par etna jaldi bhula doge andaja na tha.

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5:08:00 AM

भक्ति सार



आंखें हर पल तोहे ढूंढे राधिका
हर क्षण आंसू हैं बहते रहते
आजा सामने इक बार महारानी
हैं धन्य धाम बरसाना तेरा

3:40:00 AM

सांख्ययोग

( कर्मयोग का विषय )

एषा तेऽभिहिता साङ्‍ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां श्रृणु ।
बुद्ध्‌या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ॥

भावार्थ :  हे पार्थ! यह बुद्धि तेरे लिए ज्ञानयोग के विषय में कही गई और अब तू इसको कर्मयोग के (अध्याय 3 श्लोक 3 की टिप्पणी में इसका विस्तार देखें।) विषय में सुन- जिस बुद्धि से युक्त हुआ तू कर्मों के बंधन को भली-भाँति त्याग देगा अर्थात सर्वथा नष्ट कर डालेगा॥39॥

यनेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवातो न विद्यते ।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्‌ ॥

भावार्थ :   इस कर्मयोग में आरंभ का अर्थात बीज का नाश नहीं है और उलटा फलरूप दोष भी नहीं है, बल्कि इस कर्मयोग रूप धर्म का थोड़ा-सा भी साधन जन्म-मृत्यु रूप महान भय से रक्षा कर लेता है॥40॥

व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन ।
बहुशाका ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्‌ ॥

भावार्थ :  हे अर्जुन! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिका बुद्धि एक ही होती है, किन्तु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चय ही बहुत भेदों वाली और अनन्त होती हैं॥41॥

यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः ।
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः ॥
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्‌ ।
क्रियाविश्लेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति ॥
भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्‌ ।
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते ॥

भावार्थ :  हे अर्जुन! जो भोगों में तन्मय हो रहे हैं, जो कर्मफल के प्रशंसक वेदवाक्यों में ही प्रीति रखते हैं, जिनकी बुद्धि में स्वर्ग ही परम प्राप्य वस्तु है और जो स्वर्ग से बढ़कर दूसरी कोई वस्तु ही नहीं है- ऐसा कहने वाले हैं, वे अविवेकीजन इस प्रकार की जिस पुष्पित अर्थात्‌ दिखाऊ शोभायुक्त वाणी को कहा करते हैं, जो कि जन्मरूप कर्मफल देने वाली एवं भोग तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए नाना प्रकार की बहुत-सी क्रियाओं का वर्णन करने वाली है, उस वाणी द्वारा जिनका चित्त हर लिया गया है, जो भोग और ऐश्वर्य में अत्यन्त आसक्त हैं, उन पुरुषों की परमात्मा में निश्चियात्मिका बुद्धि नहीं होती॥42-44॥

त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन ।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्‌ ॥

भावार्थ :  हे अर्जुन! वेद उपर्युक्त प्रकार से तीनों गुणों के कार्य रूप समस्त भोगों एवं उनके साधनों का प्रतिपादन करने वाले हैं, इसलिए तू उन भोगों एवं उनके साधनों में आसक्तिहीन, हर्ष-शोकादि द्वंद्वों से रहित, नित्यवस्तु परमात्मा में स्थित योग (अप्राप्त की प्राप्ति का नाम 'योग' है।) क्षेम (प्राप्त वस्तु की रक्षा का नाम 'क्षेम' है।) को न चाहने वाला और स्वाधीन अन्तःकरण वाला हो॥45॥

यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके ।
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः ॥

भावार्थ :  सब ओर से परिपूर्ण जलाशय के प्राप्त हो जाने पर छोटे जलाशय में मनुष्य का जितना प्रयोजन रहता है, ब्रह्म को तत्व से जानने वाले ब्राह्मण का समस्त वेदों में उतना ही प्रयोजन रह जाता है॥46॥

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥

भावार्थ :  तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो॥47॥

योगस्थः कुरु कर्माणि संग त्यक्त्वा धनंजय ।
सिद्धयसिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥

भावार्थ : हे धनंजय! तू आसक्ति को त्यागकर तथा सिद्धि और असिद्धि में समान बुद्धिवाला होकर योग में स्थित हुआ कर्तव्य कर्मों को कर, समत्व (जो कुछ भी कर्म किया जाए, उसके पूर्ण होने और न होने में तथा उसके फल में समभाव रहने का नाम 'समत्व' है।) ही योग कहलाता है॥48॥

दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनंजय ।
बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः ॥

भावार्थ : इस समत्वरूप बुद्धियोग से सकाम कर्म अत्यन्त ही निम्न श्रेणी का है। इसलिए हे धनंजय! तू समबुद्धि में ही रक्षा का उपाय ढूँढ अर्थात्‌ बुद्धियोग का ही आश्रय ग्रहण कर क्योंकि फल के हेतु बनने वाले अत्यन्त दीन हैं॥49॥

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्‌ ॥

भावार्थ : समबुद्धियुक्त पुरुष पुण्य और पाप दोनों को इसी लोक में त्याग देता है अर्थात उनसे मुक्त हो जाता है। इससे तू समत्व रूप योग में लग जा, यह समत्व रूप योग ही कर्मों में कुशलता है अर्थात कर्मबंध से छूटने का उपाय है॥50॥

कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः ।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्‌ ॥

भावार्थ : क्योंकि समबुद्धि से युक्त ज्ञानीजन कर्मों से उत्पन्न होने वाले फल को त्यागकर जन्मरूप बंधन से मुक्त हो निर्विकार परम पद को प्राप्त हो जाते हैं॥51॥

यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति ।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥

भावार्थ : जिस काल में तेरी बुद्धि मोहरूपी दलदल को भलीभाँति पार कर जाएगी, उस समय तू सुने हुए और सुनने में आने वाले इस लोक और परलोक संबंधी सभी भोगों से वैराग्य को प्राप्त हो जाएगा॥52॥

श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला ।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ॥

भावार्थ : भाँति-भाँति के वचनों को सुनने से विचलित हुई तेरी बुद्धि जब परमात्मा में अचल और स्थिर ठहर जाएगी, तब तू योग को प्राप्त हो जाएगा अर्थात तेरा परमात्मा से नित्य संयोग हो जाएगा॥53॥


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