Saturday, March 23, 2013

भगत सिंह कविता



तू ना रोना, के तू है भगत सिंह की माँ

मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं
डोली चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी
हँसके हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं

जलते भी गये कहते भी गये
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसीका जीना है
जो मरना देश पर जाने

जब शहीदों की डोली उठे धूम से
देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं
पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन
उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों मैं जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन

कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से
कोई यू पी से है, कोई बंगाल से
तेरी पूजा की थाली में लाये हैं हम
फूल हर रंग के, आज हर डाल से
नाम कुछ भी सही पर लगन एक है
जोत से जोत दिल की जगा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन ...

तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र
उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम
तेरी धरती पे है जो कदम ग़ैर का
उस कदम का निशाँ तक मिटा देंगे हम
जो भी दीवार आयेगी अब सामने
ठोकरों से उसे हम गिरा जायेंगे

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2 comments:

  1. मुझे बहुत गर्व है की मेरा जन्म इस देश में हुआ जहाँ सिख कौम की स्थापना हुयी इस बात का नाज़ है मेरे गुरुओ ने हमेसा धर्म की लड़ाई लड़ी, धर्म के लिए शहीद हुए इतिहास में दर्ज है की कैसे कैसे दिन गुरुओ ने देखा इतिहास पढ़कर शायद ही किसी के आँशु न टपके , और फक्र की बात है मेरे देश के लिये शहीद भगत सिंह ने ऐसी क़ुरबानी दी सिख होने की ऐसी मिशाल पेश की है अँगरेज़ ही नहीं मुगल भी थरथरा जाये,, आज भगत सिंह का आखरी शंदेश पढ़ कर रोना आगया गर्व से छाती चौड़ी हो गयी,, ऐ भगत सिंह तू ही हक़दार है देश को आजादी दिलाने के लिए, और कुछ तो गद्दार है जिन्होंने देश की आजादी में श्रेय लेने में कोई कसर नही छोड़ी,,

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  2. मुझे आप पर बहुत ज्यादा गर्व है भगत सिंह की जय

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