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Tuesday, July 16, 2013

मन देख के रोता है

मन देख के रोता है हुआ ये जो तमाशा है
हुई तार तार देखो जन जन की आशा है !!

बच्चे कितने दुधमुहे चिल्लाते हैं,
माता के आँसू झरझर बहे जाते हैं,
मृत्यु को मांगते हैं भूख के डर से,
शासन का देखो क्या गज़ब तमाशा है !!

मन देख के रोता है हुआ ये जो तमाशा है,
हुई तार तार देखो जन जन की आशा है !!

वादों पर वादे हैं इन सत्ताखोरों के,
गाल बजाने में इनका क्या जाता है,
घर अपने बनाते ये मदद की राशि से,
रहम जरा भी न पीड़ितों पर आता है !!

मन देख के रोता है हुआ ये जो तमाशा है,
हुई तार तार देखो जन जन की आशा है !!

लाचार हुई देखो ममता चिल्लाती है,
बेबस होकर माँ इन्हें घास खिलाती है,
मानवता घायल हो आँसू बहाती है,
जीने का विश्वास इनका उठता जाता है !!

मन देख के रोता है हुआ ये जो तमाशा है,
हुई तार तार देखो जन जन की आशा है !!

इन दुखियों पर क्यों रहम न आता है,
धरती का सीना क्यों फट नहीं जाता है,
भोजन का ग्रास मेरे नहीं मुख में जाता है,
हमसे ही इनकी देखो कितनी आशा है !!

मन देख के रोता है हुआ ये जो तमाशा है,
हुई तार तार देखो जन जन की आशा है !!

प्रकृति कराहती है बादल भी रोते हैं,
क्या करें पीड़ित न समझ में आता है,
आयें आगे मिलकर सब जन भारत के,
मानवता की सबसे इनको आशा है !!

मन देख के रोता है हुआ ये जो तमाशा है हुई,
तार तार देखो जन जन की आशा है !!

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