अध्याय 3 कर्मयोग श्लोक : १९ तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचार | असक्तो ह्याचरन्कर्...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 18 in hindi
अध्याय 3 कर्मयोग श्लोक - 18 नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्र्चन ! न चास्य सर्वभूतेषु कश्र्चिदर्थव्यपाश्रयः !!१८!! न - क...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 17 in hindi
अध्याय 3 - कर्मयोग श्लोक - 17 यस्त्वत्मरतिरेव स्यादात्मत्रिप्तश्र्च मानवः ! आत्मन्येव च संतुष्ट्स्य कार्य न विधते !! १७ !! ...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 16 in hindi
अध्याय-3 कर्मयोग श्लोक 16 एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः ! आघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति !! १६ !! एवम् - इस प्रकार;...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 15 in hindi
अध्याय : 3 कर्मयोग श्लोक : 15 कर्म ब्र्ह्मोभ्दवं विध्दि ब्रह्माक्षरसमुभ्द्वम ! तस्मात्सवर्गतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 14 in hindi
अध्याय 3 - कर्मयोग श्लोक - 14 प्राणी अन्न पर आश्रित है, जो वर्षा से उत्पन होता है! वर्षा यज्ञ सम्पन्न करने से होता है और यज्ञ ...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 13 in hindi
अध्याय 3: कर्मयोग श्लोक 13 भगवान के भक्त सभी प्रकार के पापो से मुक्त हो जाते है, क्योकि वे यज्ञ में अर्पित किये भोजन(प्रसाद) क...
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Srimad Bhagwat Geeta Adhyay 3 Karmayog shloka 12 in hindi
अध्याय 3 : कर्मयोग श्लोक 3 . 12 जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले विभिन्न देवता यज्ञ सम्पन्न होने ...
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